अपना नया स्टूडियो रचते समय हम बार-बार उसी अनुभूति पर लौटते रहे। मंदिर को दोहराने के लिए नहीं, बल्कि गति, सामग्री, अनुपात, प्रकाश, बनावट और मौन के उसके दर्शन से सीखने के लिए। हम चाहते थे कि स्टूडियो में प्रवेश का अनुभव सायास लगे—आपकी गति धीमी हो, संवाद का निमंत्रण मिले और डिज़ाइन शुरू होने से पहले विचार के लिए स्थान बने।